सोलह सोमवार व्रत: विधि, कथा और नियम
भगवान शिव और माता पार्वती · लगातार 16 सोमवार
सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है और लगातार सोलह सोमवार तक रखा जाता है। कई लोग इसे सावन, कार्तिक, चैत्र या मार्गशीर्ष महीने से शुरू करते हैं। परिवार इसे अच्छे जीवनसाथी, घर की खुशहाली और मन की शांति की कामना से रखते हैं।
🗓 आने वाली तारीखें (दिल्ली)
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अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर
व्रत विधि
- पहले सोमवार की सुबह नहाकर सोलह सोमवार का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफ़ेद फूल चढ़ाएँ।
- 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और माता पार्वती की भी पूजा करें।
- शाम को कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
- गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना चूरमा प्रसाद चढ़ाएँ।
आम नियम
- कई परिवार दिन में एक ही बार, शाम की पूजा के बाद भोजन करते हैं, अक्सर प्रसाद ही।
- कुछ घरों में उस दिन नमक नहीं खाया जाता।
- प्रसाद को अक्सर तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: एक भगवान का, एक बाँटने का और एक व्रती के लिए।
- पूजा का समय हर हफ़्ते लगभग एक जैसा रखना कई लोगों को अच्छा लगता है।
व्रत कथा
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती अमरावती नगर के एक सुंदर मंदिर में आए। समय बिताने के लिए पार्वती जी ने चौपड़ खेलने की इच्छा जताई। मंदिर के पुजारी से पूछा गया कि कौन जीतेगा, तो उसने बिना सोचे कह दिया, शिव जी। पर खेल पार्वती जी ने जीता, और पुजारी की बिना सोचे कही बात उन्हें अच्छी नहीं लगी।
कुछ समय बाद पुजारी बीमार पड़ गया और उसके दिन कठिन हो गए। एक दिन स्वर्ग की कुछ अप्सराएँ उस मंदिर में आईं। पुजारी को बीमार देखकर उन्होंने उसे सोलह सोमवार के व्रत के बारे में बताया: हर सोमवार शिव जी की पूजा करो, आटे, गुड़ और घी का प्रसाद बनाओ और उसे बाँटो।
पुजारी ने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा। सोलह सोमवार पूरे होते-होते उसकी सेहत लौट आई और जीवन फिर से संभल गया। जब शिव-पार्वती दोबारा आए, तो पार्वती जी ने पूछा कि वह ठीक कैसे हुआ। व्रत की बात सुनकर उन्होंने भी यह व्रत रखा, और फिर यह कथा घर-घर पहुँची।
आज भी कई परिवार इसी सरल श्रद्धा से सोलह सोमवार रखते हैं।
कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।
उद्यापन
कई परिवार सत्रहवें सोमवार को उद्यापन करते हैं। शिव-पार्वती की पूजा होती है, कई घरों में हवन भी, और चूरमा प्रसाद बनाकर बाँटा जाता है। किसी ब्राह्मण या गरीब परिवार को भोजन कराना भी आम है। तरीके हर घर में अलग हैं, इसलिए लोग अपने परिवार की परंपरा या अपने पंडित जी की सलाह मानते हैं।
सवाल-जवाब
- सोलह सोमवार व्रत कब शुरू करें?
- बहुत से लोग सावन, कार्तिक, चैत्र या मार्गशीर्ष महीने के पहले सोमवार से शुरू करते हैं। कुछ परिवार किसी भी शुभ सोमवार से शुरू कर लेते हैं। आप अपने घर की परंपरा देखकर चुन सकते हैं।
- उद्यापन किस सोमवार को होता है?
- आमतौर पर सोलह सोमवार पूरे होने के बाद, सत्रहवें सोमवार को। कुछ परिवार सोलहवें सोमवार को ही कर लेते हैं।
- पीरियड्स या बीमारी में कोई सोमवार छूट जाए तो?
- कई परिवार बस अगले सोमवार से जारी रखते हैं और छूटे सोमवार को गिनती में नहीं जोड़ते। अब तक की गिनती बनी रहती है। कुछ लोग उस दिन मन में शिव जी को याद कर लेते हैं। आप जो ठीक समझें, वही करें।
यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।