संतोषी माता व्रत: विधि, कथा और नियम

संतोषी माता · हर शुक्रवार

संतोषी माता व्रत शुक्रवार को रखा जाता है और आमतौर पर 16 शुक्रवार तक चलता है। संतोषी माँ को संतोष और खुशी की देवी माना जाता है। गुड़ और भुने चने का प्रसाद और उस दिन खट्टी चीज़ों से परहेज़ इस व्रत की ख़ास पहचान है।

गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

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अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर

व्रत विधि

  1. सुबह नहाकर 16 शुक्रवार (या अपनी चुनी संख्या) का संकल्प लें।
  2. संतोषी माता का चित्र रखें और पास में पानी से भरा कलश रखें।
  3. कलश पर एक कटोरी में गुड़ और भुने चने रखें।
  4. दीया जलाकर कथा पढ़ें या सुनें, फिर आरती करें।
  5. गुड़-चने का प्रसाद बाँटें और कलश का जल घर में छिड़कें या तुलसी में डालें।

आम नियम

  • उस दिन व्रती कुछ भी खट्टा नहीं खाते, जैसे इमली, नींबू, दही या अचार।
  • परंपरा से उस दिन घर के दूसरे लोगों को भी खट्टा परोसा नहीं जाता।
  • कई लोग दिन में एक बार भोजन करते हैं, बिना खट्टे के।
  • गुड़ और भुना चना ही मुख्य प्रसाद माना जाता है।

व्रत कथा

एक बुढ़िया के सात बेटे थे। छह बड़े बेटे कमाते थे, पर सबसे छोटे के पास अभी काम नहीं था। घर में उसे बचा-खुचा खाना मिलता, और उसकी पत्नी चुपचाप घर के सबसे भारी काम करती। दुखी होकर छोटा बेटा काम ढूँढने दूर शहर चला गया और बहू घर पर रह गई।

एक दिन लकड़ी लाते समय बहू ने कुछ महिलाओं को पूजा करते देखा। पूछने पर उन्होंने संतोषी माता के शुक्रवार व्रत के बारे में बताया: गुड़-चने का भोग लगाओ, कथा सुनो और उस दिन कुछ भी खट्टा मत खाओ। बहू ने सच्चे मन से व्रत शुरू किया।

जल्द ही पति की चिट्ठी और पैसे आने लगे, और फिर वह ख़ुद अच्छा कमाकर घर लौटा। व्रत पूरे होने पर बहू ने उद्यापन रखा। उस दिन घर के कुछ बच्चों ने अनजाने में पैसे लेकर इमली ख़रीद ली, और दिन का नियम पूरा नहीं हो पाया। कुछ समय के लिए फिर मुश्किलें आईं। बहू ने शांति और सावधानी से दोबारा उद्यापन किया, और घर में फिर सुख-शांति लौट आई।

कई परिवार उसके धैर्य और संतोष को याद करते हुए यह व्रत रखते हैं।

कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।

उद्यापन

संकल्प पूरा होने पर आख़िरी शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है। आमतौर पर आठ बालकों को खीर-पूरी और चने की सब्ज़ी जैसा भोजन कराया जाता है और छोटा सा उपहार दिया जाता है। उस दिन भी भोजन में और उपहार के रूप में कुछ खट्टा नहीं दिया जाता, और बच्चों को पैसे की जगह फल या मिठाई दी जाती है।

सवाल-जवाब

संतोषी माता व्रत में कितने शुक्रवार होते हैं?
ज़्यादातर परिवार 16 शुक्रवार रखते हैं और उसके बाद उद्यापन करते हैं। कुछ लोग अपनी कामना पूरी होने तक रखते हैं। परंपराएँ अलग-अलग हैं, आप अपने हिसाब से चुन सकते हैं।
क्या घर के बाकी लोग उस दिन खट्टा खा सकते हैं?
परंपरा से उस दिन घर में किसी को खट्टा परोसा नहीं जाता। बहुत से परिवार बस उस दिन का मेन्यू ऐसा रखते हैं जिसमें खट्टा न हो। यह आपके घर की सहमति पर है।
यात्रा या पीरियड्स में शुक्रवार छूट जाए तो?
कई परिवार बस अगले शुक्रवार से जारी रखते हैं। छूटा शुक्रवार गिनती में नहीं जुड़ता, पर पहले की गिनती बनी रहती है। आप जैसा ठीक समझें।
गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।