संकष्टी चतुर्थी व्रत: विधि, कथा और नियम

भगवान गणेश · हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी

संकष्टी चतुर्थी गणेश जी को समर्पित है और हर महीने पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। लोग दिन भर उपवास रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद व्रत खोलते हैं। बहुत से लोग इसे 12 या 21 बार के संकल्प के साथ रखते हैं।

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अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर

व्रत विधि

  1. सुबह नहाकर गणेश जी के सामने संकल्प लें।
  2. गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक या लड्डू चढ़ाएँ।
  3. गणेश अथर्वशीर्ष या 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें।
  4. शाम को संकष्टी कथा सुनें और आरती करें।
  5. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य दें।
  6. अर्घ्य के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलें।

आम नियम

  • कई लोग दिन भर फलाहार करते हैं, कुछ लोग निर्जल रहते हैं।
  • व्रत चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही खोला जाता है।
  • बादल हों तो कई परिवार पंचांग में दिए चंद्रोदय के समय पर उस दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोल लेते हैं।

व्रत कथा

एक शाम एक बड़े भोज के बाद गणेश जी अपने छोटे से मूषक पर बैठकर घर लौट रहे थे। रास्ते में मूषक एक साँप से चौंककर लड़खड़ाया, और गणेश जी नीचे गिर पड़े। उनके सारे लड्डू इधर-उधर बिखर गए। ऊपर आसमान से यह देखकर चंद्रमा ज़ोर से हँस पड़ा।

गणेश जी ने ऊपर देखा और चंद्रमा से कहा कि अपनी सुंदरता पर घमंड किसी को शोभा नहीं देता। उसके बाद कुछ समय तक चंद्रमा की रोशनी फीकी पड़ गई और वह अकेला और शर्मिंदा महसूस करने लगा। देवताओं ने चंद्रमा से गणेश जी से मेल करने को कहा।

चंद्रमा विनम्र मन से गणेश जी के पास गया, माफ़ी माँगी और उनकी पूजा की। गणेश जी ने तुरंत उसे माफ़ कर दिया। उन्होंने कहा कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को लोग दिन में गणेश जी की पूजा करेंगे और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देंगे। इस तरह दोनों को एक साथ याद किया जाएगा।

इसीलिए संकष्टी चतुर्थी पर बहुत से लोग दिन भर उपवास रखते हैं और चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही व्रत खोलते हैं।

कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।

उद्यापन

12 या 21 संकष्टी पूरी होने पर कई परिवार उद्यापन करते हैं, अक्सर माघ महीने की सकट चौथ या अंगारकी चतुर्थी पर। गणेश पूजा, हवन, मोदक का भोग और ब्राह्मण या गरीब को भोजन व दान आम है।

सवाल-जवाब

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलें?
रात में चंद्रोदय के बाद, चंद्रमा को अर्घ्य देकर। चंद्रोदय का समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
संकष्टी कितनी बार रखी जाती है?
बहुत से लोग 12 या 21 संकष्टी का संकल्प लेते हैं। कुछ लोग हर महीने नियमित रखते हैं। परिवारों की परंपराएँ अलग हैं।
अंगारकी चतुर्थी क्या है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। इसे बहुत लोग ख़ास मानते हैं।
गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।