रविवार व्रत: विधि, कथा और नियम
सूर्य देव · हर रविवार
रविवार व्रत सूर्य देव को समर्पित है। बहुत से लोग इसे 12 रविवार के संकल्प के साथ रखते हैं। लोग इसे अच्छी सेहत, आँखों की रोशनी, मान-सम्मान और घर में उजाले की कामना से रखते हैं।
🗓 आने वाली तारीखें (दिल्ली)
- रविवार, 8 नवंबर 2026
- रविवार, 15 नवंबर 2026
- रविवार, 22 नवंबर 2026
- रविवार, 29 नवंबर 2026
- रविवार, 6 दिसंबर 2026
- रविवार, 13 दिसंबर 2026
- रविवार, 20 दिसंबर 2026
- रविवार, 27 दिसंबर 2026
अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर
व्रत विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर नहाएँ और संकल्प लें।
- तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, रोली और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- 'ॐ सूर्याय नमः' या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
- रविवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
- सूरज ढलने से पहले एक बार भोजन करें।
आम नियम
- बहुत से लोग उस दिन नमक नहीं खाते।
- भोजन आमतौर पर दिन में एक बार, सूरज ढलने से पहले किया जाता है।
- गुड़, गेहूँ और लाल चीज़ों का दान आम है।
व्रत कथा
एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी, जिसकी रविवार की एक प्यारी आदत थी। हर रविवार वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर अपना आँगन लीपती, सादा भोजन बनाती, सूर्य देव को भोग लगाती और फिर खाती।
पड़ोसन को यह अच्छा नहीं लगा, और वह रविवार को गाय को घर के अंदर बाँधने लगी। गोबर न मिलने से बुढ़िया आँगन नहीं लीप पाई और भोग नहीं बना सकी। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और चुपचाप सो गई।
उस रात सूर्य देव सपने में आए। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे अपनी गाय और बछड़ा दिया। वह गाय इतनी अनोखी थी कि उसका गोबर सोने का हो जाता। पड़ोसन ने यह देखा और रात में गाय बदल दी। बात राजा तक पहुँची, और राजा उस अनोखी गाय को महल ले गया।
फिर सूर्य देव राजा के सपने में आए और सारी बात बताई। राजा ने गाय बुढ़िया को लौटा दी, पड़ोसन को समझाया, और पूरे राज्य में रविवार व्रत रखने की बात कही। पूरे राज्य में सुख और समृद्धि फैल गई।
कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।
उद्यापन
12 रविवार पूरे होने पर कई परिवार उद्यापन करते हैं। सूर्य देव की पूजा, छोटा हवन, और ब्राह्मण या गरीब को भोजन व लाल कपड़ा, गुड़ या गेहूँ का दान आम है।
सवाल-जवाब
- रविवार व्रत कितने रखे जाते हैं?
- बहुत से लोग 12 रविवार का संकल्प लेते हैं। कुछ लोग पूरे साल या लंबे समय तक रखते हैं। परिवारों की परंपराएँ अलग हैं।
- यात्रा या बीमारी में रविवार छूट जाए तो?
- कई परिवार बस अगले रविवार से जारी रखते हैं। पहले की गिनती बनी रहती है। हो सके तो उस दिन सूर्य को जल दे देना भी कई लोगों को अच्छा लगता है। आप जैसा ठीक समझें।
यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।