पूर्णिमा व्रत: विधि, कथा और नियम
भगवान सत्यनारायण (विष्णु) और चंद्र देव · हर महीने की पूर्णिमा
पूर्णिमा का दिन हर महीने आता है, जब चंद्रमा पूरा होता है। बहुत से परिवार इस दिन उपवास रखते हैं और सत्यनारायण कथा करते हैं या सुनते हैं। कई लोग इसे साल भर, यानी 12 पूर्णिमा के संकल्प के साथ रखते हैं।
🗓 आने वाली तारीखें (दिल्ली)
- मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- बुधवार, 23 दिसंबर 2026
- शुक्रवार, 22 जनवरी 2027
- शनिवार, 20 फ़रवरी 2027
- सोमवार, 22 मार्च 2027
- मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
- गुरुवार, 20 मई 2027
- शुक्रवार, 18 जून 2027
अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर
व्रत विधि
- सुबह नहाकर संकल्प लें। कई लोग पवित्र नदी में स्नान भी करते हैं।
- चौकी पर भगवान सत्यनारायण का चित्र, कलश और केले के पत्ते सजाएँ।
- पंचामृत, तुलसी, फल और पंजीरी या शीरा (आटे का हलवा) का भोग लगाएँ।
- परिवार के साथ सत्यनारायण कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
- रात को चंद्रमा को अर्घ्य दें, फिर प्रसाद लेकर भोजन करें।
आम नियम
- कई लोग दिन भर फलाहार करते हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करते हैं।
- कथा का प्रसाद आदर से लिया और बाँटा जाता है।
- दान, ख़ास तौर पर अन्न और कपड़ों का, इस दिन अच्छा माना जाता है।
व्रत कथा
साधु नाम के एक व्यापारी और उसकी पत्नी लीलावती ने एक बार किसी को सत्यनारायण पूजा करते देखा। साधु ने कहा कि अगर उन्हें संतान मिली, तो वह भी यह पूजा करेगा। समय आने पर बेटी कलावती का जन्म हुआ, पर साधु हर बार पूजा को आगे टालता रहा। कलावती की शादी पर भी उसने यही कहा कि बाद में करेंगे।
फिर साधु अपने दामाद के साथ लंबी व्यापार यात्रा पर गया। दूर के एक राज्य में मुश्किलें आईं: एक चोरी में उन पर ग़लत शक हुआ और उन्हें लंबे समय तक रोक लिया गया। घर पर लीलावती और कलावती ने श्रद्धा से सत्यनारायण पूजा की, और जल्द ही दोनों छूट गए।
लौटते समय एक साधु-संत ने पूछा कि नाव में क्या है। व्यापारी ने सच छिपाकर कहा कि बस पत्ते-बेलें हैं। उसे हैरानी हुई जब नाव सच में पत्तों से भरी दिखने लगी। साधु को अपनी बात समझ आई, उसने क्षमा माँगी और वचन निभाने का वादा किया। सब कुछ पहले जैसा हो गया।
परिवार पूर्णिमा पर यह कथा वचन निभाने और प्रसाद का आदर करने की सीख के लिए सुनाते हैं।
कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।
उद्यापन
12 पूर्णिमा का संकल्प पूरा होने पर कई परिवार आख़िरी पूर्णिमा को सत्यनारायण कथा, हवन और ब्राह्मण या गरीब को भोजन व दान के साथ उद्यापन करते हैं। कई लोग इसके लिए कार्तिक या वैशाख पूर्णिमा चुनते हैं।
सवाल-जवाब
- पूर्णिमा व्रत कितने रखे जाते हैं?
- बहुत से लोग साल भर की 12 पूर्णिमा का संकल्प लेते हैं। कुछ लोग इसे नियमित रखते हैं। परिवारों की परंपराएँ अलग हैं।
- क्या हर पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा की जाती है?
- बहुत से परिवार पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा करते हैं, पर यह आपकी पसंद है। कई लोग बस विष्णु जी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।
यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।