मासिक शिवरात्रि व्रत: विधि, कथा और नियम

भगवान शिव · हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी

मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है, अमावस्या से एक दिन पहले। इस दिन भगवान शिव की रात में पूजा की परंपरा है। बहुत से लोग इसे 12 मासिक शिवरात्रि के संकल्प के साथ रखते हैं।

गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

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अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर

व्रत विधि

  1. सुबह नहाकर शिव जी के सामने संकल्प लें और दिन भर उपवास रखें।
  2. शाम को शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफ़ेद फूल चढ़ाएँ।
  3. रात में 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें, कई लोग निशीथ काल में ख़ास पूजा करते हैं।
  4. शिवरात्रि कथा सुनें और आरती करें।
  5. अगली सुबह पूजा करके व्रत खोलें।

आम नियम

  • कई लोग दिन भर फलाहार करते हैं, कुछ लोग निर्जल रहते हैं।
  • रात में जागरण या भजन करना बहुत से लोगों को अच्छा लगता है, पर यह अपनी सेहत के हिसाब से है।
  • शिवलिंग पर हल्दी और तुलसी आमतौर पर नहीं चढ़ाई जाती।

व्रत कथा

बहुत पहले चित्रभानु नाम का एक शिकारी अपने परिवार के लिए भोजन ढूँढने जंगल गया। शाम तक उसे कुछ नहीं मिला, तो वह एक तालाब के पास बेल के पेड़ पर चढ़कर रात भर इंतज़ार करने लगा। उसे पता नहीं था कि पेड़ के नीचे एक शिवलिंग है।

इंतज़ार करते हुए वह बेल के पत्ते तोड़-तोड़कर नीचे गिराता रहा। उसकी पानी की थैली से बूँदें भी नीचे गिरती रहीं। इस तरह रात भर, अनजाने में, वह शिव जी को बेलपत्र और जल चढ़ाता रहा, और उसने दिन भर कुछ खाया भी नहीं था।

रात में एक-एक करके हिरण तालाब पर आए। हर बार जब उसने धनुष उठाया, तो हिरण ने कहा कि पहले उसे अपने बच्चों से मिल आने दो, वह लौट आएगा। शिकारी ने उन्हें जाने दिया। सुबह सारे हिरण अपना वादा निभाकर लौट आए। यह देखकर शिकारी का दिल पिघल गया। उसने सबको जाने दिया और शिकार छोड़ दिया।

रात भर की अनजानी पूजा से उसका मन बदल गया था। शिव जी की कृपा उस पर हुई और उसका जीवन नई राह पर चल पड़ा। कई परिवार शिवरात्रि की रात यह कथा याद करते हैं।

कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।

उद्यापन

12 मासिक शिवरात्रि का संकल्प पूरा होने पर कई परिवार उद्यापन करते हैं, अक्सर फाल्गुन की महाशिवरात्रि पर। रुद्राभिषेक, हवन, और ब्राह्मण या गरीब को भोजन व दान आम है।

सवाल-जवाब

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या फ़र्क है?
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण चतुर्दशी को आती है। फाल्गुन महीने की कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहते हैं, जो साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि है।
कोई मासिक शिवरात्रि छूट जाए तो?
कई परिवार बस अगली मासिक शिवरात्रि से जारी रखते हैं। पहले की गिनती बनी रहती है। आप जैसा ठीक समझें।
गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।