गुरुवार व्रत (बृहस्पतिवार व्रत): विधि, कथा और नियम

बृहस्पति देव और भगवान विष्णु · हर गुरुवार

गुरुवार व्रत बृहस्पति देव और भगवान विष्णु को समर्पित है। बहुत से लोग इसे 16 गुरुवार के संकल्प के साथ, शुक्ल पक्ष के किसी गुरुवार से शुरू करते हैं। पीले रंग, चने की दाल और गुड़ का इस व्रत में ख़ास स्थान है।

गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

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  • गुरुवार, 17 दिसंबर 2026
  • गुरुवार, 24 दिसंबर 2026

अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर

व्रत विधि

  1. सुबह नहाकर पीले कपड़े पहनें और संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु या बृहस्पति देव को पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ चढ़ाएँ।
  3. कई परिवार केले के पेड़ की पूजा करते हैं और उसकी जड़ में जल चढ़ाते हैं।
  4. दीया जलाकर गुरुवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें और आरती करें।
  5. प्रसाद बाँटें और शाम को एक बार पीला भोजन करें।

आम नियम

  • बहुत से लोग दिन में एक बार पीला भोजन करते हैं, जैसे चने की दाल या बेसन की चीज़।
  • कई परिवार उस दिन नमक नहीं खाते।
  • कुछ घरों में गुरुवार को बाल धोना या कपड़े धोना टाला जाता है।
  • केला पूजा में चढ़ाया जाता है, इसलिए कई व्रती उस दिन केला नहीं खाते।

व्रत कथा

एक धनी राजा था, जो बहुत दानी था। पर उसकी रानी को दान देना अच्छा नहीं लगता था। दरवाज़े पर कोई आता, तो रानी उसे ख़ाली हाथ लौटा देती।

एक गुरुवार बृहस्पति देव साधु का रूप लेकर महल में भिक्षा माँगने आए। रानी ने कहा कि वह इस धन और इसकी देखभाल से थक गई है। साधु मुस्कुराए और उसे गुरुवार के दिन करने के कुछ ऐसे काम बताए जिनसे धन चला जाए, जैसा वह चाहती थी। रानी ने वही किया, और सच में थोड़े ही दिनों में सारा धन चला गया। दिन कठिन हो गए, सादा भोजन भी मुश्किल से मिलता।

तब साधु फिर आए। इस बार रानी ने हाथ जोड़कर पूछा कि घर में फिर सुख कैसे लौटे। साधु ने गुरुवार व्रत बताया: पीले कपड़े पहनो, भगवान विष्णु और केले के पेड़ की पूजा करो, चने की दाल और गुड़ चढ़ाओ, और दूसरों के साथ बाँटो। रानी ने पूरे मन से व्रत रखा। धीरे-धीरे घर फिर संपन्न हो गया, और अब रानी को देने में ख़ुशी मिलने लगी।

यह कथा देने वाले मन की एक कोमल सीख है।

कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।

उद्यापन

16 गुरुवार पूरे होने पर, आमतौर पर सत्रहवें गुरुवार को, उद्यापन किया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा, पीले कपड़े, चने की दाल, गुड़, हल्दी और केले का दान आम है, और कई परिवार ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराते हैं।

सवाल-जवाब

गुरुवार व्रत कब शुरू करें और कितने रखें?
बहुत से लोग शुक्ल पक्ष के किसी गुरुवार से शुरू करते हैं और 16 गुरुवार रखते हैं। कुछ परिवार 1, 3 या 5 साल तक भी रखते हैं। अपने घर की परंपरा के अनुसार चुनें।
पीरियड्स या यात्रा में गुरुवार छूट जाए तो?
कई परिवार बस अगले गुरुवार से जारी रखते हैं और उस गुरुवार को गिनती में नहीं जोड़ते। पहले की गिनती बनी रहती है। आप अपनी सुविधा से तय कर सकते हैं।
गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।