एकादशी व्रत: विधि, कथा और नियम

भगवान विष्णु · हर महीने दोनों पक्षों की एकादशी तिथि

एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और हर महीने दो बार, शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। साल में आमतौर पर 24 एकादशी होती हैं, और अधिक मास वाले साल में 26। व्रत अगले दिन, द्वादशी को, पारण के समय में खोला जाता है।

गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

🗓 आने वाली तारीखें (दिल्ली)

  • गुरुवार, 5 नवंबर 2026
  • शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
  • शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
  • रविवार, 20 दिसंबर 2026
  • रविवार, 3 जनवरी 2027
  • सोमवार, 18 जनवरी 2027
  • मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027
  • बुधवार, 17 फ़रवरी 2027

अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर

व्रत विधि

  1. दशमी की शाम से हल्का, सात्विक भोजन करें।
  2. एकादशी की सुबह नहाकर भगवान विष्णु के सामने संकल्प लें।
  3. पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ।
  4. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें और उस एकादशी की कथा सुनें।
  5. रात में भजन-कीर्तन करना कई लोगों को अच्छा लगता है।
  6. द्वादशी को पारण के समय में, किसी को दान देकर व्रत खोला जाता है।

आम नियम

  • एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। कई लोग फलाहार करते हैं, कुछ निर्जल व्रत रखते हैं।
  • तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रखे जाते हैं, एकादशी को नहीं तोड़े जाते।
  • प्याज़, लहसुन और तामसिक भोजन से दूरी रखी जाती है।
  • पारण का समय पंचांग से देखा जाता है, हरि वासर के बाद और द्वादशी ख़त्म होने से पहले।

व्रत कथा

प्राचीन समय में मुर नाम का एक बलवान असुर था, जिसने देवताओं को बहुत परेशान किया और उन्हें उनके लोक से निकाल दिया। देवता मदद के लिए भगवान विष्णु के पास गए। विष्णु जी ने मुर और उसकी सेना का लंबे समय तक सामना किया। फिर थककर वे बदरिकाश्रम की हिमवती नाम की शांत गुफा में आराम करने चले गए।

मुर उनके पीछे-पीछे वहाँ पहुँच गया। उसी समय विष्णु जी के शरीर से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। वे प्रकाश और शक्ति से भरी थीं, और उन्होंने अकेले ही मुर को हरा दिया।

जब विष्णु जी जागे, तो बहुत प्रसन्न हुए। क्योंकि वे ग्यारहवीं तिथि को प्रकट हुई थीं, उन्होंने उनका नाम एकादशी रखा और वरदान माँगने को कहा। देवी ने माँगा कि जो लोग उनके दिन व्रत रखें और श्रद्धा से विष्णु जी को याद करें, उन्हें अपने रास्ते पर सहारा मिले। विष्णु जी ने ख़ुशी से यह वर दिया।

यह पहली एकादशी मार्गशीर्ष महीने में थी, जिसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। बहुत से लोग अपना एकादशी व्रत इसी दिन से शुरू करते हैं।

कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।

उद्यापन

जब साल भर की एकादशी का संकल्प पूरा होता है, तो कई परिवार उद्यापन करते हैं, अक्सर मार्गशीर्ष की उत्पन्ना एकादशी पर। विष्णु पूजा, हवन, और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन व दान आम है। तरीका अपने पंडित जी से पूछ लेना अच्छा रहता है।

सवाल-जवाब

साल में कितनी एकादशी होती हैं?
आमतौर पर 24, यानी हर महीने दो। जिस साल अधिक मास होता है, उसमें 26 एकादशी होती हैं।
एकादशी का व्रत कब खोला जाता है?
व्रत अगले दिन, द्वादशी को, पारण के समय में खोला जाता है। यह समय सूर्योदय के बाद और द्वादशी ख़त्म होने से पहले होता है। सही समय अपने शहर के पंचांग में देखें।
पीरियड्स या बीमारी में एकादशी पर क्या करें?
कई परिवारों में ऐसे समय उपवास नहीं रखा जाता, बस मन में भगवान को याद किया जाता है या सादा फलाहार लिया जाता है। अगली एकादशी से फिर रख सकते हैं, गिनती बनी रहती है। अपनी सेहत को पहले रखें।
गिनती हम रखेंगे: कितने हुए, अगली तारीख, उद्यापन का दिन। मुफ़्त।अपनी गिनती शुरू करें →

यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।