अमावस्या व्रत: विधि, कथा और नियम
पितृ (पूर्वज) और भगवान विष्णु · हर महीने की अमावस्या
अमावस्या वह दिन है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता। परंपरा से यह दिन पूर्वजों को याद करने, पितृ तर्पण और दीपदान का है। कई लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं, और कुछ लोग इसे 12 अमावस्या के संकल्प के साथ रखते हैं।
🗓 आने वाली तारीखें (दिल्ली)
- सोमवार, 9 नवंबर 2026
- मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
- गुरुवार, 7 जनवरी 2027
- शनिवार, 6 फ़रवरी 2027
- सोमवार, 8 मार्च 2027
- मंगलवार, 6 अप्रैल 2027
- गुरुवार, 6 मई 2027
- शुक्रवार, 4 जून 2027
अगला शुक्ल पक्ष लगभग शुरू: मंगलवार, 10 नवंबर
व्रत विधि
- सुबह नहाएँ, हो सके तो किसी नदी या तीर्थ पर।
- जल में काले तिल और कुशा डालकर पितरों को तर्पण दें।
- भोजन का एक हिस्सा गाय, कौवे और कुत्ते के लिए निकालें।
- किसी गरीब को भोजन, कपड़े या अन्न का दान करें।
- शाम को पीपल के पेड़ के नीचे और घर के दरवाज़े पर दीया जलाएँ।
आम नियम
- कई लोग दिन भर उपवास रखते हैं या एक बार सादा भोजन करते हैं।
- इस दिन सात्विक भोजन और शांत मन रखने की परंपरा है।
- सोमवार को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या और शनिवार की शनि अमावस्या ख़ास मानी जाती हैं।
व्रत कथा
अमावस्या की कोई एक तय कथा नहीं है। यह दिन याद करने का दिन है।
सोचिए, अमावस्या की एक सुबह एक पुराने घर में दादी सबसे पहले उठती हैं और बच्चों को साथ लेकर नदी किनारे जाती हैं। वहाँ पिताजी जल में काले तिल और कुशा डालकर धीरे-धीरे अपने माता-पिता और दादा-दादी के नाम लेते हैं। बच्चे पूछते हैं कि ऐसा क्यों। दादी मुस्कुराकर कहती हैं कि यही वे लोग हैं जिन्होंने हमें हमारा नाम, हमारा घर और हमारे संस्कार दिए, और आज हम उन्हें धन्यवाद कह रहे हैं।
घर लौटकर सादा भोजन बनता है। थोड़ा गाय के लिए, थोड़ा कौवों के लिए और थोड़ा कुत्ते के लिए निकाला जाता है, और कुछ खाना किसी गरीब परिवार को दिया जाता है। शाम को पीपल के नीचे एक दीया जलता है और एक दरवाज़े पर, ताकि अँधेरी रात में भी थोड़ी रोशनी रहे।
बच्चे यह महसूस करते हुए सोते हैं कि परिवार घर में रहने वालों से कहीं बड़ा है। यही अमावस्या का भाव है: हमसे पहले आए लोगों के प्रति आभार।
कथा हमारे अपने शब्दों में, परंपरा से चली आ रही कहानी पर आधारित।
उद्यापन
अमावस्या का कोई एक तय उद्यापन नहीं है। जो लोग 12 अमावस्या का संकल्प लेते हैं, वे अक्सर आख़िरी अमावस्या पर पितरों के नाम भोजन, दान और दीपदान करके इसे पूरा करते हैं। कई परिवार इसके लिए सोमवती अमावस्या चुनते हैं।
सवाल-जवाब
- अमावस्या पर क्या किया जाता है?
- परंपरा से पितरों को तर्पण, गरीबों को दान, गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन, और शाम को पीपल के नीचे दीपदान। कई लोग उपवास भी रखते हैं।
- सोमवती अमावस्या क्या है?
- जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। कई सुहागिन महिलाएँ इस दिन पीपल की परिक्रमा करती हैं।
यह जानकारी अभी पंडित जी की समीक्षा में है। परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग होती हैं।